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VSSD COLLEGE
Vikramajit Singh Sanatan Dharma College, Nawabganj, Kanpur
Accredited ‘A’ Grade by NAAC
माननीय सचिव प्रबंध समिति सी०ए० नीतू सिंह जी की प्रेरणा एवं प्रोत्साहन से हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में 16 सितंबर 2026 को विक्रमाजीत सिंह सनातन धर्म कॉलेज, कानपुर में हिंदी विभाग एवं सांस्कृतिक समिति के संयुक्त तत्वावधान में लघुकथा लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया

माननीय सचिव प्रबंध समिति सी०ए० नीतू सिंह जी की प्रेरणा एवं प्रोत्साहन से हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में 16 सितंबर 2026 को विक्रमाजीत सिंह सनातन धर्म कॉलेज, कानपुर में हिंदी विभाग एवं सांस्कृतिक समिति के संयुक्त तत्वावधान में लघुकथा लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया

Published: September 16, 2026 By VSSD Content Uploader
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मक चिंतन, कल्पनाशीलता, लेखन-कौशल तथा हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति रुचि को प्रोत्साहित करना रहा। यह आयोजन विद्यार्थियों को अपनी सृजनात्मक प्रतिभा को एक नए और रोचक माध्यम से अभिव्यक्त करने का अवसर प्रदान करने वाला रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ० के० के० गुप्ता जी, संयुक्त सचिव, प्रबंध समिति, वी० एस० एस० डी० कालेज ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए रचनात्मक एवं साहित्यिक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा को निरंतर निखारने तथा ऐसे अवसरों का रचनात्मक उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो० (डॉ०) नीरू टंडन जी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए साहित्य और संस्कृति को विद्यार्थी जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियाँ विद्यार्थियों में लेखन-कौशल के साथ-साथ उनकी कल्पनाशक्ति, संवेदनशीलता और अभिव्यक्ति की क्षमता को भी समृद्ध करती हैं। उन्होंने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए प्रतियोगिता की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर विधि विभाग प्रभारी प्रो० आर० के० पाण्डे जी ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को आगामी प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाएँ देते हुए उन्हें पूरे उत्साह, आत्मविश्वास एवं रचनात्मकता के साथ प्रतिभाग करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएँ विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा को पहचानने तथा उसे निखारने का अवसर प्रदान करती हैं। हिन्दी विभाग के प्रभारी प्रो० (डॉ०) राकेश कुमार शुक्ल जी ने प्रतियोगिता की विशिष्ट अवधारणा को रोचक ढंग से समझाया। उन्होंने बताया कि सामान्यतः किसी कलाकार को कहानी या कथानक दिया जाता है और वह उसे चित्र के माध्यम से अभिव्यक्त करता है, जबकि इस प्रतियोगिता में इसके विपरीत चित्र को देखकर उसके आधार पर कहानी की रचना करनी थी। प्रतिभागियों को चित्र में दिखाई देने वाले पात्रों, परिस्थितियों और भावनाओं की कल्पना करते हुए मौलिक लघुकथा विकसित करनी थी। इस प्रकार यह गतिविधि विद्यार्थियों की कल्पनाशक्ति और सृजनात्मक अभिव्यक्ति को परखने का अनूठा माध्यम बनी। कार्यक्रम में सांस्कृतिक समिति की संयोजिका डॉ० कविता श्रीवास्तव जी ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित किया। प्रतियोगिता से संबंधित आवश्यक नियम एवं दिशा-निर्देश की जानकारी विधि विभाग की सहायक आचार्या एवं सांस्कृतिक समिति के अंतर्गत लिटरेरी, डिबेट, क्विज़ एवं क्रिएटिव एक्टिविटीज़ की समन्वयक डॉ. काजल कुशवाहा द्वारा प्रदान की गई, तथा कार्यक्रम में सफलतापूर्वक मंच संचालन उनके द्वारा किया गया। कार्यक्रम में हिंदी विभाग के सभी प्राध्यापकों एवं सांस्कृतिक समिति के सदस्यों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में विधि विभाग के श्री राजेश कुमार विश्वकर्मा जी, प्रीती जायसवाल जी, डॉ. रिचा सिंह राठौर जी एवं ऋतिका चौरसिया जी का भी सक्रिय एवं सराहनीय योगदान रहा। उनके सहयोग से कार्यक्रम सुचारु रूप से संपन्न हो सका । प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया और चित्रों को अपनी कल्पना के माध्यम से जीवंत करते हुए मौलिक एवं रचनात्मक लघुकथाओं का सृजन किया। प्रतिभागियों ने अपने लेखन के माध्यम से विभिन्न सामाजिक, मानवीय एवं समसामयिक भावों को अभिव्यक्त करने का प्रयास किया। प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों को केवल लेखन का अवसर ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें किसी दृश्य को अपने दृष्टिकोण से समझने और उसे शब्दों के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने का अनुभव भी प्रदान किया। अंत में सांस्कृतिक समिति के सह-संयोजक डॉ० संजीव कुमार सिंह द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। उन्होंने मुख्य अतिथि, प्राचार्या, विभागाध्यक्ष, समस्त प्राध्यापकों, सांस्कृतिक समिति के सदस्यों एवं प्रतिभागी विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी सदस्यों को धन्यवाद देते हुए कहा कि विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा को मंच प्रदान करने वाली ऐसी गतिविधियाँ उनके सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने भविष्य में भी इस प्रकार की साहित्यिक एवं सृजनात्मक गतिविधियों के निरंतर आयोजन की अपेक्षा व्यक्त की। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। समग्र रूप से हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों की कल्पनाशक्ति, लेखन-कौशल और सृजनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करने वाला एक सार्थक एवं अभिनव साहित्यिक प्रयास रहा। प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मक सोच को शब्दों में अभिव्यक्त करने तथा हिंदी भाषा के प्रति अपनी रुचि और संवेदनशीलता को और अधिक विकसित करने का अवसर प्राप्त हुआ।