Guest lecturer on the topic “Criminal Law Reforms in India: Restrospect & Prospect” was organised in the Law Department of the college on 25.09.2025.
Published: September 25, 2025
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दिनांक 25 सितम्बर 2025 को महाविद्यालय के मूट कोर्ट हॉल में विधि विभाग के अन्तर्गत एक व्याख्यान का आयोजन किया गया। जिसका विषय "Criminal Law Reforms In India: Retrospect & Prospect" पर था। इस अवसर पर मुख्य अतिथि, डॉ. अंजलि दीक्षित, महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो० बिपिन चन्द्र कौशिक जी, एवं उप-प्राचार्या प्रो० नीरु टण्डन जी, विधि विभाग के प्रभारी प्रो० आर० के० पाण्डेय** आदि के द्वारा माँ सरस्वती के दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया।
अतिथियों का परिचय विधि विभाग के प्रभारी प्रो० आर० के० पाण्डेय द्वारा दिया गया।
मुख्य अतिथि के रूप में आई हुई डॉ अंजलि दीक्षित, एसोसिएट प्रोफेसर एम०एन०एन०आई०टी० विश्वविद्यालय, प्रयागराज, सोफिया विधि विभाग द्वारा छात्र-छात्राओं को अपराधिक विषयों में सुधार के विषय में विस्तृत जानकारी प्रदान की गयी। उन्होंने इस सुधार के विषय में यह भी बताया कि इसका पूर्ववर्ती एवं भविष्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा। मुख्य अतिथि ने 1860 के दण्ड संहिता के भारतीय दण्ड संहिता के विषय में विस्तृत जानकारी प्रदान कर वर्तमान में उसकी धाराओं के विषय में बताया। उन्होंने यह भी बताया कि अपराधी न्याय व्यवस्था अति प्राचीन थी, लेकिन वर्तमान समय के अनुसार सुधार की आवश्यकता थी। अतः सरकार ने अपराधों विषयों में संशोधन कर नये अपराधिक कानून का निर्माण किया है। जो वर्तमान में प्रभावी हैं. मुख्य अतिथि के व्याख्यान ने छात्र-छात्राओं का ज्ञान वर्धन किया और विधि विषय की महत्ता को बताया।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो० बिपिन चन्द्र कौशिक द्वारा छात्र-छात्राओं को प्राकृतिक विधि एवं नैतिक विधि के विषय में जानकारी प्रदान कर वर्तमान आपराधिक विधि के विषय में विस्तृत जानकारी प्रदान की गयी।
प्रो० नीरु टण्डन द्वारा मुख्य अतिथि का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया। इस अवसर पर मंच का संचालन श्रीमती प्रज्ञा श्रीवास्तव द्वारा किया गया एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ स्वेता रानी द्वारा किया गया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के श्री राम बकस, श्री ए०के० उपाध्याय, प्रो० पी०एन० त्रिवेदी, डॉ० प्रीति सिंह, डॉ० प्रतिभा चतुर्वेदी, श्रीमती प्रीति जयसवाल सहित समस्त शिक्षक एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।